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By MahaDBT Team Updated: June 23, 2026

Gopinath Munde Shetkari Apghat Suraksha Yojana: Financial Support for Farmer Families

अगर तू कभी गांव की जिंदगी को करीब से देखे तो एक बात बहुत जल्दी समझ में आ जाएगी कि किसान की जिंदगी बाहर से जितनी आसान दिखाई देती है असल में उतनी होती नहीं है। शहर के अंदर काम करने वाले बहुत से लोगों की नौकरी का एक तय समय होता है। सुबह काम पर जाना है और शाम को वापस आना है। छुट्टियां भी होती हैं और कई मामलों में सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं भी मौजूद होती हैं। लेकिन किसान की जिंदगी का पूरा हिसाब किताब अलग होता है।

देख इसमें किसान का दिन सूरज निकलने से पहले शुरू हो जाता है। कई बार वह सुबह अंधेरा रहते ही खेत की तरफ निकल जाता है। कभी सिंचाई का काम होता है तो कभी फसल की देखभाल करनी होती है। कभी खाद डालनी होती है तो कभी कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है। कई बार मौसम की वजह से रात में भी खेतों तक जाना पड़ जाता है। मतलब किसान का जीवन किसी घड़ी के हिसाब से नहीं चलता बल्कि परिस्थितियों के हिसाब से चलता है।

अब जरा एक बात पर ध्यान दे। जब भी खेती की चर्चा होती है तो लोग बीज की बात करते हैं, सिंचाई की बात करते हैं, उत्पादन की बात करते हैं और सरकारी स्कीमों की बात करते हैं। लेकिन एक बहुत जरूरी विषय अक्सर पीछे छूट जाता है और वह है किसान की सुरक्षा। क्योंकि खेती केवल मेहनत का काम नहीं है बल्कि इसके अंदर जोखिम भी बहुत ज्यादा होते हैं।

चल तू मान ले कि एक किसान ट्रैक्टर लेकर खेत में काम कर रहा है। अचानक कोई हादसा हो जाता है। किसी किसान को खेत में लगे बिजली के उपकरण से चोट लग सकती है। कोई किसान कुएं के आसपास काम करते समय दुर्घटना का शिकार हो सकता है। कई बार खेत से घर आते जाते समय सड़क दुर्घटना भी हो जाती है। ऐसे हादसे किसी को बताकर नहीं आते और जब आते हैं तो पूरी जिंदगी बदलकर रख देते हैं।

अब जरा उस फैमिली की स्थिति सोच जो पूरी तरह एक किसान की कमाई पर निर्भर हो। अगर किसी दुर्घटना में उस किसान की मौत हो जाए या वह ऐसी स्थिति में पहुंच जाए जहां आगे काम करना संभव न हो तो उस फैमिली पर क्या गुजरेगी। घर का खर्च कैसे चलेगा। बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी। दवाइयों का खर्च कैसे निकलेगा। रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। यही वह स्थिति है जहां इस परेशानी को केवल सहानुभूति से दूर नहीं किया जा सकता।

यहीं से ऐसी स्कीमों की जरूरत समझ में आती है। क्योंकि जब कोई संकट अचानक आता है तब केवल भावनात्मक सहारा काफी नहीं होता बल्कि आर्थिक सहायता भी जरूरी हो जाती है। इसी सोच के साथ गोपीनाथ मुंडे शेतकरी अपघात सुरक्षा सानुग्रह अनुदान स्कीम को आगे लाया गया ताकि किसान और उसकी फैमिली को कठिन समय में कुछ राहत मिल सके।

बहुत से लोग सोचते हैं कि ऐसी स्कीमें केवल पैसा देने के लिए बनाई जाती हैं। लेकिन अगर गहराई से देखा जाए तो इसका मकसद उससे कहीं बड़ा है। असली मकसद यह भरोसा देना है कि अगर किसी किसान के साथ कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती है तो उसकी फैमिली पूरी तरह अकेली नहीं छोड़ी जाएगी।

अभी के टाइम में यह बात और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि खेती पहले की तुलना में काफी बदल चुकी है। पहले बहुत सारे काम हाथों से किए जाते थे लेकिन अब मशीनों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, पंप सेट और दूसरे कृषि उपकरण किसानों के काम को आसान तो बनाते हैं लेकिन साथ ही नए जोखिम भी लेकर आते हैं। मशीन जितनी बड़ी होती है दुर्घटना की संभावना भी उतनी गंभीर हो सकती है।

यही वजह है कि अभी के टाइम में किसान सुरक्षा को लेकर चर्चा पहले की तुलना में ज्यादा बढ़ी है। क्योंकि खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई बल्कि सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी बन चुकी है।

Table of Contents

स्कीम की जरूरत आखिर क्यों पड़ी और इसके पीछे सरकार की सोच क्या रही

जब किसी स्कीम को समझने की कोशिश की जाती है तो सबसे पहले यह समझना जरूरी होता है कि आखिर उसकी जरूरत क्यों पड़ी। क्योंकि कोई भी स्कीम बिना कारण नहीं बनाई जाती। उसके पीछे कोई न कोई वास्तविक स्थिति जरूर होती है।

देख इसमें सरकार ने लंबे समय तक ग्रामीण इलाकों की स्थितियों को देखा। यह समझने की कोशिश की कि किसान किन चुनौतियों का सामना करते हैं। उस दौरान एक बात बार बार सामने आई कि दुर्घटना के मामलों में किसान फैमिली को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अगर किसी नौकरी करने वाले व्यक्ति के साथ कोई घटना हो जाती है तो कई बार उसके पास बीमा होता है या दूसरी सुरक्षा व्यवस्थाएं होती हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों के बहुत सारे किसान ऐसे होते हैं जिनके पास इस तरह की सुविधाएं नहीं होतीं। ऐसे में जब कोई हादसा होता है तो पूरी फैमिली आर्थिक संकट में पहुंच सकती है।

चल एक उदाहरण से समझ। मान ले किसी किसान के दो बच्चे हैं। बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं। घर की पूरी कमाई खेती से आ रही है। अचानक किसी दुर्घटना में किसान की मृत्यु हो जाती है। अब उस फैमिली के सामने केवल दुख नहीं आता बल्कि आर्थिक संकट भी खड़ा हो जाता है। बच्चों की फीस रुक सकती है। घर का राशन प्रभावित हो सकता है। कई बार लोगों को कर्ज लेने तक की नौबत आ जाती है।

सरकार ने इसी स्थिति को देखते हुए यह महसूस किया कि ऐसी घटनाओं के लिए एक व्यवस्थित सहायता व्यवस्था होनी चाहिए। ताकि प्रभावित फैमिली को शुरुआती समय में कुछ आर्थिक राहत मिल सके और वह पूरी तरह टूटने से बच सके।

यही सोच इस स्कीम की सबसे बड़ी नींव मानी जाती है।

समाज के अंदर इस स्कीम का महत्व इतना ज्यादा क्यों माना जाता है

अगर किसी समाज की मजबूती को समझना हो तो केवल बड़ी इमारतें देखकर फैसला नहीं किया जा सकता। असली तस्वीर तब सामने आती है जब यह देखा जाए कि उस समाज के कमजोर और संकटग्रस्त लोगों के लिए क्या व्यवस्था मौजूद है।

देख इसमें किसान केवल अपनी फैमिली के लिए काम नहीं करता। वह पूरे समाज के लिए अन्न पैदा करता है। अगर किसान मजबूत रहेगा तो कृषि मजबूत रहेगी और अगर कृषि मजबूत रहेगी तो देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत बनी रहेगी।

यही कारण है कि किसान सुरक्षा से जुड़ी स्कीमों को केवल सहायता कार्यक्रम नहीं माना जाता बल्कि समाज के अंदर सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

जब किसी किसान की फैमिली को दुर्घटना के बाद सहायता मिलती है तो उसका असर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। बच्चों की पढ़ाई बच सकती है। घर की जरूरतें पूरी हो सकती हैं। फैमिली को नया सहारा मिल सकता है। यानी यह स्कीम एक तरह से पूरे जीवन को संभालने का प्रयास करती है।

और शायद यही इसकी सबसे बड़ी खासियत भी है कि यह केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रहती बल्कि लोगों के अंदर यह भरोसा भी पैदा करती है कि कठिन समय में कोई व्यवस्था उनके साथ खड़ी है।

इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य क्या है

अगर सीधे शब्दों में कहा जाए तो इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना से प्रभावित किसान फैमिली को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। लेकिन अगर थोड़ा गहराई से देखा जाए तो इसके उद्देश्य केवल यहीं तक सीमित नहीं हैं।

इसका पहला उद्देश्य किसान फैमिली को अचानक आने वाले आर्थिक संकट से बचाना है।

दूसरा उद्देश्य यह है कि दुर्घटना के बाद फैमिली को जीवन फिर से संभालने का अवसर मिल सके।

तीसरा उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के अंदर सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाना है।

चौथा उद्देश्य किसानों के अंदर विश्वास की भावना बनाए रखना है ताकि उन्हें यह महसूस हो कि कठिन समय में भी कुछ सहारा मौजूद है।

और पांचवां उद्देश्य यह है कि दुर्घटना के कारण किसी फैमिली का पूरा भविष्य प्रभावित न हो जाए।

यही कारण है कि इस स्कीम को केवल आर्थिक सहायता वाली स्कीम मानना इसकी पूरी तस्वीर को न देख पाने जैसा होगा।

अभी के टाइम में इस स्कीम की जरूरत पहले से ज्यादा क्यों महसूस की जा रही है

अगर कुछ साल पहले और अभी के टाइम में खेती की तुलना की जाए तो बहुत बड़ा बदलाव दिखाई देता है। पहले खेती के अंदर बहुत सारे काम हाथों से किए जाते थे लेकिन अब मशीनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, थ्रेशर, स्प्रे मशीन और दूसरे आधुनिक उपकरण किसानों के काम को आसान तो बना रहे हैं लेकिन साथ ही जोखिम भी बढ़ा रहे हैं।

देख इसमें मशीन जितनी बड़ी होती है दुर्घटना की संभावना भी उतनी गंभीर हो सकती है। कई बार छोटी सी गलती भी बड़ा हादसा बन जाती है। इसके अलावा खेतों में बिजली से जुड़े उपकरणों का उपयोग बढ़ा है। बोरवेल और पंप सेट का इस्तेमाल बढ़ा है। कई किसान रसायनों के साथ काम करते हैं। मतलब खेती के अंदर पहले की तुलना में जोखिम कम नहीं बल्कि कई मामलों में ज्यादा हो गया है।

अब जरा सोच अगर किसी किसान के साथ ऐसी स्थिति हो जाए जहां वह आगे काम करने की हालत में न रहे तो उसकी फैमिली पर क्या असर पड़ेगा। खेती रुक सकती है। आय रुक सकती है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। घर के खर्च संभालना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि अभी के टाइम में ऐसी स्कीमों का महत्व पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है।

असल में यह स्कीम केवल दुर्घटना के बाद पैसा देने का माध्यम नहीं है बल्कि किसानों को मानसिक सुरक्षा भी देती है। उन्हें यह भरोसा मिलता है कि अगर कोई अप्रत्याशित घटना हो जाती है तो उनकी फैमिली के लिए कुछ न कुछ सहारा मौजूद रहेगा।

गोपीनाथ मुंडे के नाम से इस स्कीम को जोड़ने का महत्व क्या है

महाराष्ट्र की राजनीति और ग्रामीण समाज के विकास की बात हो और गोपीनाथ मुंडे का नाम न आए ऐसा बहुत कम होता है। Gopinath Munde को ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले नेताओं में माना जाता है।

देख इसमें जब किसी स्कीम को किसी ऐसे व्यक्ति के नाम से जोड़ा जाता है जिसने समाज के किसी विशेष वर्ग के लिए काम किया हो तो उसका एक प्रतीकात्मक महत्व भी बन जाता है। यह केवल नाम नहीं रहता बल्कि उस सोच का प्रतिनिधित्व करता है जिसके तहत किसानों के कल्याण और सुरक्षा को महत्व दिया जाता है।

यही कारण है कि इस स्कीम को केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं माना जाता बल्कि किसानों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी सोच का हिस्सा भी माना जाता है।

DBT सिस्टम का महत्व क्या है

पहले कई सरकारी प्रक्रियाओं में लोगों को काफी इंतजार करना पड़ता था। कई स्तरों पर फाइलें जाती थीं और सहायता राशि पहुंचने में समय लग जाता था। लेकिन अभी के टाइम में DBT यानी Direct Benefit Transfer सिस्टम ने काफी बदलाव किया है।

देख इसमें सबसे बड़ा फायदा यह है कि स्वीकृत सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जा सकती है। इससे पारदर्शिता बढ़ती है। बीच की प्रक्रियाएं कम होती हैं। समय की बचत होती है और लाभार्थी को ज्यादा भरोसा मिलता है।

यही वजह है कि आज अधिकांश महत्वपूर्ण सरकारी स्कीमों के अंदर DBT व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती है।

आवेदन करने से पहले किन बातों को समझ लेना जरूरी है

बहुत सारे लोग किसी स्कीम के बारे में सुनते ही आवेदन करने की सोच लेते हैं लेकिन यह तरीका हमेशा सही नहीं होता।

देख इसमें सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि जिस दुर्घटना के आधार पर आवेदन किया जा रहा है वह स्कीम के दायरे में आती है या नहीं। इसके अलावा पात्रता नियमों को भी ध्यान से समझना जरूरी होता है।

कई बार लोग बिना जानकारी के आवेदन कर देते हैं और बाद में पता चलता है कि कोई जरूरी शर्त पूरी नहीं हो रही थी। इसलिए आवेदन करने से पहले पूरी जानकारी समझ लेना सबसे अच्छा कदम माना जाता है।

आवेदन के लिए कौन कौन से जरूरी डॉक्यूमेंट लग सकते हैं

जरूरी डॉक्यूमेंटउपयोग
आधार कार्डपहचान सत्यापन
निवासी प्रमाण पत्रपात्रता जांच
किसान पंजीकरण प्रमाणकिसान होने का प्रमाण
दुर्घटना रिपोर्ट या FIRदुर्घटना सत्यापन
मृत्यु प्रमाण पत्रमृत्यु की स्थिति में
मेडिकल प्रमाण पत्रस्थायी अपंगता की स्थिति में
बैंक पासबुकसहायता प्राप्त करने के लिए
पासपोर्ट फोटोरिकॉर्ड हेतु
आधार लिंक बैंक खाताDBT भुगतान हेतु
अन्य विभागीय दस्तावेजआवश्यकता अनुसार

देख इसमें सभी डॉक्यूमेंट के अंदर दर्ज जानकारी एक जैसी होनी चाहिए। नाम, जन्मतिथि और अन्य विवरण अलग अलग होने पर परेशानी आ सकती है।

आवेदन प्रक्रिया को आसान भाषा में समझें

अगर पूरी प्रक्रिया को आसान तरीके से समझा जाए तो यह कुछ इस तरह होती है।

सबसे पहले स्कीम की जानकारी प्राप्त करनी होती है।

उसके बाद पात्रता की जांच करनी होती है।

फिर सभी जरूरी डॉक्यूमेंट तैयार करने होते हैं।

इसके बाद आवेदन फॉर्म भरना होता है।

फॉर्म के साथ जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं।

फिर संबंधित विभाग आवेदन की जांच करता है।

सत्यापन पूरा होने के बाद पात्रता तय की जाती है।

और अंत में स्वीकृत सहायता राशि लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।

देख इसमें जल्दबाजी से ज्यादा जरूरी सावधानी होती है। एक छोटी गलती भी आवेदन को प्रभावित कर सकती है।

इस स्कीम के प्रमुख फायदे क्या हैं

अगर इस स्कीम को केवल आर्थिक सहायता के नजरिए से देखा जाए तो इसकी पूरी ताकत समझ में नहीं आएगी।

सबसे पहला फायदा यह है कि दुर्घटना से प्रभावित फैमिली को आर्थिक सहारा मिलता है।

दूसरा फायदा यह है कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में मदद मिल सकती है।

तीसरा फायदा यह है कि अचानक आने वाले आर्थिक संकट का असर कुछ हद तक कम हो सकता है।

चौथा फायदा यह है कि कर्ज पर निर्भरता कम हो सकती है।

पांचवां फायदा यह है कि प्रभावित फैमिली को मानसिक सुरक्षा का एहसास मिलता है।

यानी यह स्कीम केवल धनराशि नहीं देती बल्कि संकट के समय संभलने का अवसर भी देती है।

आवेदन के दौरान होने वाली सामान्य गलतियां

बहुत सारे आवेदन छोटी छोटी गलतियों की वजह से प्रभावित हो जाते हैं।

कई लोग अधूरे डॉक्यूमेंट जमा कर देते हैं।

कुछ लोग बैंक खाते की गलत जानकारी दे देते हैं।

कई मामलों में दुर्घटना से जुड़े प्रमाण पूरे नहीं होते।

कुछ लोग आवेदन करने के बाद उसकी स्थिति जांचते ही नहीं।

और कई बार लोग पात्रता नियम पढ़े बिना आवेदन कर देते हैं।

अगर इन गलतियों से बचा जाए तो पूरी प्रक्रिया काफी आसान हो सकती है।

धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से कैसे बचें

अभी के टाइम में इंटरनेट और मोबाइल के जरिए धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

अगर कोई व्यक्ति स्कीम का फायदा दिलाने के नाम पर पैसे मांगता है तो तुरंत सावधान हो जाना चाहिए।

OTP कभी किसी को नहीं बताना चाहिए।

बैंक खाते की निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

केवल आधिकारिक माध्यमों से मिली जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।

और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज से सतर्क रहना चाहिए।

FAQs

1. यह स्कीम किसके लिए बनाई गई है

यह स्कीम दुर्घटना से प्रभावित पात्र किसान परिवारों के लिए बनाई गई है।

2. क्या मृत्यु और स्थायी अपंगता दोनों स्थितियों में लाभ मिल सकता है

नियमों के अनुसार दोनों प्रकार की परिस्थितियों के लिए प्रावधान हो सकते हैं।

3. क्या FIR जरूरी होती है

कई मामलों में दुर्घटना सत्यापन के लिए इसकी जरूरत पड़ सकती है।

4. क्या बैंक खाता अनिवार्य है

हाँ क्योंकि सहायता राशि सीधे खाते में भेजी जाती है।

5. क्या आवेदन ऑनलाइन किया जा सकता है

क्षेत्र और व्यवस्था के अनुसार ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

6. क्या आधार कार्ड जरूरी है

आमतौर पर पहचान सत्यापन के लिए जरूरी माना जाता है।

7. क्या परिवार का सदस्य आवेदन कर सकता है

यदि वह नियमों के अनुसार पात्र प्रतिनिधि है तो कर सकता है।

8. क्या आवेदन की स्थिति ट्रैक की जा सकती है

कई मामलों में आवेदन स्थिति देखने की सुविधा उपलब्ध रहती है।

9. क्या गलत जानकारी देने पर आवेदन रद्द हो सकता है

हाँ ऐसा हो सकता है।

10. क्या यह स्कीम किसानों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करती है

हाँ यही कारण है कि इसे किसान सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण स्कीम माना जाता है।

तो अब आखिर में आते हैं

अगर पूरे विषय को शुरुआत से आखिर तक देखा जाए तो एक बात बिल्कुल साफ दिखाई देती है कि गोपीनाथ मुंडे शेतकरी अपघात सुरक्षा सानुग्रह अनुदान स्कीम केवल आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था नहीं है। यह किसानों और उनकी फैमिली के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र है।

किसान का जीवन हमेशा अनिश्चितताओं से भरा रहता है। मौसम की चिंता अलग होती है। खेती का जोखिम अलग होता है। बाजार की स्थिति अलग चुनौती होती है। और इन सबके बीच दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। ऐसी स्थिति में यह स्कीम किसानों को यह भरोसा देने का काम करती है कि कठिन समय में उनकी फैमिली पूरी तरह अकेली नहीं छोड़ी जाएगी।

यही वजह है कि अभी के टाइम में इस स्कीम का महत्व पहले की तुलना में और ज्यादा बढ़ गया है।

मेरी राय

अगर मेरी राय पूछी जाए तो मुझे हमेशा लगता है कि किसान से जुड़ी सुरक्षा वाली स्कीमें खेती से जुड़ी दूसरी स्कीमों जितनी ही महत्वपूर्ण होती हैं। क्योंकि खेती के अंदर उत्पादन बढ़ाना जरूरी है लेकिन उससे पहले किसान का सुरक्षित रहना जरूरी है।

देख इसमें हम अक्सर फसल, उत्पादन और कमाई की बात करते हैं लेकिन बहुत कम लोग यह सोचते हैं कि अगर किसी किसान के साथ कोई बड़ा हादसा हो जाए तो उसकी फैमिली पर क्या गुजरती होगी। जिस व्यक्ति पर पूरे घर की जिम्मेदारी हो अगर वही अचानक दुर्घटना का शिकार हो जाए तो केवल आर्थिक नुकसान नहीं होता बल्कि पूरा जीवन प्रभावित हो जाता है।

मुझे इस स्कीम की सबसे अच्छी बात यह लगती है कि यह किसान को केवल लाभार्थी की तरह नहीं देखती बल्कि उसकी परिस्थितियों को समझने की कोशिश करती है। यह मानती है कि दुर्घटना के बाद केवल दुख नहीं आता बल्कि आर्थिक संकट भी आता है और उसी संकट को कम करने की कोशिश यह स्कीम करती है।

मेरे हिसाब से भविष्य में ऐसी स्कीमों की जानकारी और ज्यादा लोगों तक पहुंचनी चाहिए। क्योंकि कई बार स्कीम मौजूद होती है लेकिन जानकारी की कमी की वजह से जरूरतमंद लोग उसका फायदा नहीं ले पाते। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ेगी तो ज्यादा परिवार समय पर आवेदन कर पाएंगे और सहायता प्राप्त कर पाएंगे।

मुझे यह भी लगता है कि किसी भी समाज की असली ताकत इस बात से पता चलती है कि वह अपने सबसे मेहनती वर्ग के साथ कैसा व्यवहार करता है। किसान पूरे समाज के लिए भोजन पैदा करता है। इसलिए उसकी सुरक्षा और उसके परिवार की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसी नजरिए से देखा जाए तो यह स्कीम केवल सहायता कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों के सम्मान और सुरक्षा की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

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